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विडियो : डलहौज़ी में याद किये आजाद हिंद फौज के संस्थापक देशभक्त नेताजी सुभाषचंद्र बोस

डलहौज़ी हलचल  (डलहौज़ी) :- आजाद हिंद फौज के संस्थापक देशभक्त नेताजी सुभाषचंद्र बोस  की 123 वीं जयंती पर सुभाष चौक डलहौजी में नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण  करके मनाई गई। इस सादे समारोह का आयोजन देशभक्त सरदार अजीत सिंह यादगार सभा डलहौजी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में एसडीएम डलहौजी, डॉक्टर मुरारी लाल  बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। उन्होंने नेताजी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि आज पुरे भारत वर्ष में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हमें नेता जी के देश के प्रति योगदान को सदा याद रखना चाहिए और हमें उनके बताये गए रास्ते पर चलना  चाहिए।

वहीँ देशभक्त सरदार अजीत सिंह यादगार सभा डलहौजी के महासचिव वीरेंद्र ठाकुर ने इस बारे जानकारी देते हुए बताया की हर वर्ष नेता जी की याद में इस सामारोह का आयोजन किया जाता है ।

इसके उपरांत तहसीलदार राजेश जरयाल तहसील कल्याण अधिकारी राजबहादुर नगर परिषद कनिष्ठ अभियंता संजीव शर्मा सेनेटरी निरीक्षक अतुल महाजन सरस्वती कला संगम अध्यक्ष विकास कुमार नशा निवारण कमेटी सदस्य रतन चंद हिमोत्कर्ष संस्था परीक्षा नियंत्रक रतन चंद शर्मा कोष कार्यालय से मनीष ठाकुर तथा प्रकाश कुमार उपमंडल अधिकारी नागरिक के कार्यालय का स्टाफ तथा देशभक्त सरदार अजीत सिंह यादगार सभा के महासचिव वीरेंद्र ठाकुर सदस्य राकेश गुप्ता कृतिका ठाकुर के अलावा स्थानीय नागरिकों ने भी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात  जिसके पश्चात उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और स्थानीय नागरिको और पर्यटकों में लड्डू भी बांटे गए

बता दें कि पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात डलहौजी का ऐतिहासिक महत्त्व भी कम नहीं है। आजाद हिंद फौज के कर्मठ नेता और जय हिंद का नारा देकर ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला देने वाले भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाष चंद्र बोस का डलहौजी से गहरा नाता रहा है। 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में जन्मे सुभाष चंद्र बोस वर्ष 1937 में मई महीने की शुरुआत में उन्होंने डलहौजी में करीब सात महीने गुप्त रूप से बिताए। डलहौजी आने से पूर्व ब्रिटिश हुकूमत ने सुभाष को जेल में डाल दिया था। यहां उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था। परिवार के आग्रह पर और बिगड़ती हालत के चलते ब्रिटिश हाई कोर्ट ने नेता जी को पैरोल पर रिहा कर दिया। इसके बाद सुभाष चंद्र बोस ने इंग्लैंड के अपने छात्र जीवन के मित्र डा. धर्मवीर और उनकी पत्नी के पास डलहौजी जाने का फैसला किया। उन दिनों डलहौजी उत्तर भारत का प्रसिद्ध आरोग्य स्थल था यहाँ वह यहाँ डॉ धर्मवीर के निवास  काइनांस इस्टेट बंगले में रुके थे जोकि गाँधी चौक से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है डॉक्टर धर्मवीर की कोठी आज भी यहां स्थित है हालाँकि अब कोठी में आम जनमानस का प्रवेश वर्जित है।

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