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गायक और लेखक एसडी कश्यप को मिलें हिमाचल गौरव का सम्मान

ManMahesh
12 Aug 2020 1:25 PM GMT
गायक और लेखक एसडी कश्यप को मिलें हिमाचल गौरव का सम्मान
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डलहौज़ी हलचल (मंडी) लीलाधर चौहान : लोक संस्कृति व लोककला के क्षेत्र में हिमाचल गौरव के सम्मान के लिए वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर अनेकों प्रतिक्रियाएं सरकार के खिलाफ आ रही है जहां हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों लोक गायकों ने सरकार द्वारा चयनित किए गए इस पुरस्कार के विरोध में आवाज उठाई है कि यह समान उस उस महागुरु को दिया जाना चाहिए जिसने हिमाचल प्रदेश के लोक गायक को देश व प्रदेश में नाम देकर बहुत बड़ा सम्मान भी दिया है ।

बता दें कि कुछ दिन पहले समाचार पत्रों के माध्यम हिमाचल प्रदेश के समस्त कलाकारों को मालूम हुआ कि हिमाचल प्रदेश में लोक गायकी के क्षेत्र में हिमाचल गौरव का पुरस्कार किसी लोक गायक को दिया जा रहा है जिस पर सोशल मीडिया के माध्यम सैकड़ों कलाकारों ने इस पुरस्कार का विरोध किया है । उन सभी का कहना है कि यह सम्मान ऐसे महागुरु और संगीत के ज्ञाता एस डी कश्यप जी दिया जाना चाहिए जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोक गायकों को एक नाम दिया है मगर अफसोस कि उनके द्वारा बनाए गए एक ऐसे कलाकार को हिमाचल गौरव के सम्मान के लिए चयनित किया गया है जो सिर्फ मंडी और कुल्लू के गीत गा सकता है।

हिमाचल प्रदेश के लोक गायकों तथा म्यूजिक डायरेक्टरों में मशहूर जिला मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र से लीलाधर चौहान, कला चौहान, करसोग क्षेत्र से नरेश भारद्वाज ,जिला कुल्लू के बंजार क्षेत्र के कपिल शर्मा, भुंतर से कुशल वर्मा, मनाली से कमलेश कुमार, आनी क्षेत्र से ललित शर्मा ,जिला शिमला से किशन वर्मा सहित हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों कलाकार सोशल मीडिया पर एस डी कश्यप जी के पक्ष में उतरे हैं।

वर्तमान समय में लोक गायकों का एक विशाल समूह जानता है कि हिमाचली संस्कृति के विख्यात ज्ञाता एक ही महागुरु है आदरणीय श्री एसडी कश्यप जी है जो हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को समझाने वाले या 12 जिलों के गीत गाने की क्षमता रखते हैं जिसके लिए उन्हें हिमाचल गौरव का सम्मान बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था मगर आज भी अगर यह सम्मान उन्हें दिया जाता है तो हिमाचल का नाम देश में ऊंचा हो जाएगा।

महागुरु एस डी कश्यप द्वारा लिखे व संगीत से संवारे गीत आज सभी लोक गायक गाते हैं। हमने जानकारी हासिल की है कि उन्होंने अपने घर में कुछ कलाकारों को बच्चों की तरह पाल पोस कर बड़ा किया और उन्हें अपने खर्च पर संगीत की शिक्षा दी मगर अफसोस के बाद में वे कलाकार अपने गुरु को भूल गए हालांकि सबसे पहले तो ऐसे लोक गायकों को सरकार के ध्यान में ऐसी बातें लानी चाहिए थी जिन्हें महागुरु ने शरण दी थी।

हिमाचल प्रदेश के समस्त लोक गायकों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि पुरस्कार के लिए सबसे पहले सरकार को एक क्राइटेरिया बनाना चाहिए कि किस लोक गायक ने कितने समय से हिमाचल की संस्कृति के लिए क्या किया है और किसके आधार पर किया है। हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को देश में प्रसारित करने वाले समस्त लोक गायकों व कलाकारों की सूची बनानी चाहिए और यह भी अंकित किया जाना चाहिए कि उनके द्वारा अपने लिखे वह अपने गाए हुए कितने गीत ऐसे हैं जिन्हें पूरे देश या हिमाचल प्रदेश के लोग उनके नाम से सुनते हैं।

सबसे पहले तो सरकार को यह सर्वे करने चाहिए कि हिमाचल प्रदेश में लोकगीत की नींव रखने वाले ऐसे कौन से महान शख्सियत हैं जिन्होंने आज हिमाचल में सैकड़ों गीत लिखकर और उसमें संगीत देकर लोक गायकों को उन गीतों को गाने के लिए तैयार किया फिर आज अपना नाम पूरे देश में कमाया है। सरकार को यह जिम्मा भाषा एवं संस्कृति विभाग को दे देना चाहिए था जिससे पारदर्शिता सामने आएगी। हालांकि हमने कई बार भाषा व संस्कृति विभाग के ध्यान में लोक गायकों से संबंधित मामलों पर पत्राचार किया शिकायत पत्र भेजें जिन पर कुछ तो जरूर हुआ है मगर जितना होना चाहिए उतना नहीं हुआ है।

वर्तमान सरकार ने लोक कला को पार्टी के आधार पर पेश कर रखा है जिससे हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी लोक गायक नाराज दिख रहे हैं हमने देखा सोशल मीडिया पर वर्तमान समय में आदरणीय श्री एसडी कश्यप जी के पक्ष में सैकड़ों लोक गायक खुलकर सामने आए हैं और साफ शब्दों में लिखा है कि उन्हें हिमाचल गौरव का पुरस्कार मिलना ही चाहिए मगर अफसोस हो रहा है सरकार में बैठे मुख्यमंत्री से मंत्री तक इस बात को हल्के में क्यों ले रहे हैं । हिमाचल गौरव सम्मान के लिए मंत्री या नेता को इस काम से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए क्योंकि उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि लोक कला और कलाकारी में क्या फर्क है।

अगर हिमाचल प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक को लोक संस्कृति के बारे में ज्यादा ही ज्ञान है तो वह एक गीत लिखकर और मंच पर गा करके दिखाएं और अपनी हिमाचली संस्कृति पर कुछ विशेष बनाएं अन्यथा उन्हें अधिकार भी नहीं है कि राजनीतिक आधार पर हिमाचल गौरव का सम्मान किसी ऐसे गायक को दें जो सिर्फ अपने मंडी कुल्लू तक ही सीमित है।

हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को समझाने वाले या 12 जिलों के गीत गाने वाले एसडी कश्यप को मिलें हिमाचल गौरव का सम्मान

हमारी जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में लोक कला या से लोक संस्कृति को जन्म देने वाले एकमात्र ऐसे गीतकार ,संगीतकार ,लोक गायक एवं लोक गायकों के निर्माता आदरणीय श्री एसडी कश्यप जी हैं जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के सभी लोक गायकों को नए-नए गीत बना कर अपने स्टूडियो में एक नाम दिया उसके बाद भले ही लोक गायक अपने बलबूते पर काम कर रहे हैं मगर असली पहचान उन्होंने दी है।

भाषा एवं संस्कृति विभाग को इस बारे सर्वे करने चाहिए जिससे लोक संस्कृति पर वर्षों से काम करने वाले संगीत के ज्ञाता आदरणीय कश्यप जी को पूरे जीवन का थोड़ा सा सम्मान तो मिले। वैसे तो यह सम्मान उनके लिए बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था मगर कौन ऐसा नेक कार्य करने में रुचि रखता है क्योंकि सभी मुख्यमंत्री तथा मंत्री सहित सभी पार्टी के नेता अपनी पार्टी व अपने घर तक सीमित होते हैं जिन्हें इस तरह के सम्मानजनक कार्य करने में रुचि नहीं है।


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