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चंबा

एक दर्जी चमन लाल की कहानी जो हर किसी को देती है प्रेरणा, बेटा बना डॉक्टर

8 July 2020 3:47 AM GMT
एक दर्जी चमन लाल की कहानी जो हर किसी को देती है प्रेरणा, बेटा बना डॉक्टर
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संकल्प और साहस हो तो हम अपनी उम्मीदों को पूरा कर सकते हैं। इंसान केवल हाड़-मांस का पुतला नहीं है उसके अंदर असीम ताकत छिपी है। जो उस ताकत को पहचान लेता है वह असंभव को संभव बना देता है। आदमी अगर ठान ले तो कुछ भी कर सकता है। कुछ ऐसा ही डलहौज़ी के वार्ड नंबर दो लोहाली के एक व्यक्ति ने कर दिखाया है। अपनी एक टांग के खराब हो जाने के बाद भी इस शक्श ने हिम्मत नहीं हारी और आज उनके द्वारा अपने बच्चों को दी हुई बेहतर परवरिश और उच्च संस्कारों का ही नतीजा है कि उनके बड़े बेटे ने वो कर दिखाया है जिसकी हर कोई मिसाल दे रहा है। डलहौज़ी के वार्ड नंबर दो लोहाली के रहने वाले चमन लाल के बेटे साहिल ने तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए अपनी मेहनत और अपने पिता के सही मार्गदर्शन के चलते दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में डॉक्टर के पद पर नियुक्ति पाई हैं।

अपने बेटे की इस उपलब्धि से चमन लाल फुले नहीं समा रहे है। हो भी क्यूँ न उनके बेटे ने उनके सपने को पूरा करते हुए आज उन्हें गौरवान्वित कर दिया है। चमन लाल इस बात से बेहद खुश है कि उनका बेटा आज कोरोना माहामारी के इस काल में दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहा है। चमन लाल डलहौज़ी के गाँधी चौक में स्थित तिब्बती मार्किट में के छोटे से खोखा नुमा दूकान में बीते करीब 25 वर्षों से दर्जी का काम कर रहे है और इसी से उनके घर का गुजारा चलता है। वहीँ उनकी माता आशा देवी एक ग्रहणी है। इनका एक और बेटा है जोकि जिसने बनीखेत के डीएवी कॉलेज से बीए की पढाई समाप्त की है।

गौरतलब है कि एक दुर्घटना में चमन लाल की एक टांग में चोट लग गई थी जिसके बाद से उनकी एक टांग खराब हो गई थी। वावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन को उन्होंने बेहतर ढंग से जीने की और किसी पर मोहताज न रहने का संकल्प लिया। उन्होंने दर्जी का काम शुरू कर दिया। विवाह के बाद उनके दो बेटे हुए जिनकों उन्होंने बेहतर शिक्षा प्रदान करने की भरपूर कोशिश की। उनके बेटे साहिल ने भी मेहनत में कोई कमी नहीं दिखाई और पहले जवाहर नवोदय विद्यालय सरोल में प्रवेश पाया और उसके बाद वहां पर बाहरवीं तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद नीट की परीक्षा को भी उतीर्ण किया और वर्तमान में वे सफदरजंग हॉस्पिटल में डॉक्टर के पद पर नियुक्त हुए है।

चमन लाल ने बताया कि उनके बेटे ने उनके सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं रखी और वो हर रोज 8 से 9 घंटे पढ़ाई करता था। शुरू से ही उसमे डॉक्टर बनने की ललक थी और वो हमेशा ये कहता था कि मै आपके सपने को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करुंगा। अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए चमन लाल ने जिंदगी की पूरी कमाई लगा दी। पुत्र को जितने पैसे की जरूरत होती थी। उससे अधिक पैसा उसको देते थे। उम्मीद थी कि बेटा डॉक्टर बनने के बाद उनका नाम रोशन करेगा और अब उनका ये सपना सच हो गया है।

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