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कुल्लू की खराहल घाटी में तेंदुए का खौफ़, रात भर देना पड़ता है पालतू जानवरों के लिये पहरा

7 Jun 2020 6:30 AM GMT
कुल्लू की खराहल घाटी में तेंदुए का खौफ़, रात भर देना पड़ता है पालतू जानवरों के लिये पहरा
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खराहल घाटी के अंतर्गत आने वाले युवक मंडल चताणी के अध्यक्ष फतेह सिंह राणा व चताणी वार्ड की पंच रांता देवी का कहना है कि चताणी व आसपास के क्षेत्र में तेंदुए ने काफी समय से आतंक मचा रखा है। इससे रात के समय घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। क्षेत्र में तेंदुए ने दर्जनों कुत्तों, गाय व भेड़ों को अपना निशाना बना दिया है। फतेह सिंह राणा ने कहा कि कुत्तों को हम पहरा करने के लिए पालते हैं लेकिन यहां स्थिति इससे उल्ट है। रात भर कुत्तों के लिए पहरा देना पड़ता है या फिर उन्हें कमरों में बंद करके रखना पड़ता है।

डुगभ्रा में रविवार सुबह को तेंदुए ने एक गाय को मार दिया। फतेह सिंह राणा के ही अब तक चार कुत्तों को तेंदुए ने अपना निवाला बना दिया है। चतानी वार्ड पंच रांता देवी का एक कुत्ता, चतानी के अर्जुन का एक कुत्ता, बिंदु के दो कुत्ते, कोट गांव से तुले राम व मोतीराम के 1-1 कुत्ते, कोट गांव के गंगाराम, बदलोगी से कर्मचंद व धर्मचंद का एक-एक कुत्ता, डुगभ्रा के हुक्म राम की एक भेड़, अरोगी गांव के नानक चंद का एक कुत्ता व देहनीधार से चुन्नीलाल का एक कुत्ता भी इसमें शामिल है। फतेह सिंह राणा ने कहा कि तेंदुओं की संख्या 1 से अधिक है और कई बार एक ही रात में ये कई स्थानों पर पशुओं को अपना शिकार बना रहे हैं। इनके खौफ के कारण रात के समय घरों से बाहर निकलना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग को पूर्व में भी इससे अवगत करवा दिया था लेकिन अभी तक कोई भी कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो आने वाले समय में ये तेंदुए इंसानों पर भी झपट सकते हैं।

उन्होंने मांग की है कि वन विभाग को इनके लिए पिंजरे लगाने चाहिए ताकि समय पर कोई जानी नुकसान न हो।

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