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चंबा

पुजारी और राज कन्या ने पूजा कर शुरू किया सूही माता मेला, पहली बार नहीं जुटी भीड़

10 April 2020 6:11 AM GMT
पुजारी और राज कन्या ने पूजा कर शुरू किया सूही माता मेला, पहली बार नहीं जुटी भीड़
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चंबा जिला के प्रसिद्ध तीन दिवसीय सूही मेले का आगाज माता सुनयना की ही पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पुरे विश्व में फैले कोरोना वायरस के चलते चंबा के इतिहास में पहली बार शहर में मनाये जाने वाले सूही माता मेला को इस बार लोगों की सहभागिता के बिना मनाया जाएगा। परंपरा कायम रखने के लिए इस बार केवल पुजारी और राज कन्या ही तय समयानुसार माता की पूजा करेंगी।

प्रदेश में मेलों के आयोजन पर रोक और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए लोगों की भीड़ नहीं जुटाई जाएगी। प्रशासन के सहयोग से हर साल रानी के बलिदान का सूही माता मेला बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते लोगों की सहभागिता के बिना मनाया जाएगा।

शुक्रवार को मेले का आगाज हुआ। परंपरा कायम रखने को पुजारी व राज कन्या ने राजमहल (पिंक पैलेस) में पूजा-अर्चना की। नगर परिषद चंबा के दो सदस्य भी उपस्थित रहे। पिंक पैलेस से एक झंडा लेकर सूही माता मंदिर तक पहुंचाया गया। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया।

11 अप्रैल को मलूणा में जाकर पंडित और राज कन्या पूजा करेंगे। रविवार सुबह और शाम को पूजा-अर्चना के बाद मेले का विधिवत समापन होगा। उधर, नगर परिषद चंबा की अध्यक्ष नीलम नैयर ने बताया कि इस बार मेला साधारण रूप से मनाया जा रहा है। परंपरा कायम रखने को पुजारी और राज कन्या ही तय समयानुसार माता की पूजा करेंगी।

मान्यता है कि रानी सुनयना ने शहर में पानी की किल्लत दूर करने को समाधि ली थी। रानी को एक स्वप्न आया था, जिसके बाद रानी ने समाधि ली थी। इसके बाद चंबा में पानी की किल्लत दूर हो गई थी। रानी सुनयना ने चंबावासियों के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण दे दिए थे।

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