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ऊना

मेधावी छात्रों को दी जा रही ऑनलाइन कोचिंग

11 July 2020 9:18 PM GMT
मेधावी छात्रों को दी जा रही ऑनलाइन कोचिंग
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वैष्विक कोरोना संकट के मध्य देश के प्रतिष्ठित आईआईटी और अन्य संस्थानों में प्रवेश पाने का सपना देख रहे ऊना सुपर-50 के सितारे रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। कोरोना संकट के तमाम उतार-चढ़ावों से जूझने के बावजूद आधुनिक तकनीक के माध्यम से ज़िला के मेधावी छात्रों की कोचिंग जारी हैय जिससे उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। कोचिंग पार्टनर कंपनी ऑनलाइन सत्र आयोजित कर रही है और अभ्यर्थियों को इंटरनेट के माध्यम से इंजिनियरिंग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर रही है।

ऊना सुपर-50 कार्यक्रम की शुरूआत 01 जुलाई, 2019 को हुई थी; जब ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने ज़िला मुख्यालय ऊना के बीआरसी भवन में ऊना सुपर-50 कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। इस कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों का चयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से हुआ था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे प्रतिभावान विद्यार्थियों को कोचिंग सुविधा प्रदान करना था, जो साधनों के अभाव में पिछड़ जाते हैं।

ऊना सुपर-50 के तहत ज़िला में तीन केन्द्रो में कोचिंग दी जा रही है। ऊना के साथ-साथ थाना कलां तथा अंबोटा में भी विद्यार्थियों की सुविधा के लिए केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि उनके बहुमूल्य समय की बचत हो सके।

ऊना सुपर-50 कार्यक्रम के माध्यम से कोचिंग ग्रहण कर रहे छात्र सिद्धांत ने बताते हैं कि विद्यार्थी कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के बाद कोचिंग सेंटर के स्मार्ट क्लास रूम में जाकर कोचिंग नहीं ले पा रहे थे, जिसके चलते वेब क्लास शुरू की गई है। अब छात्र घर पर बैठ कर ही आसानी से कोचिंग ग्रहण कर रहे हैं। कोचिंग देने वाले अध्यापक ऑनलाइन ही सभी प्रश्नों का उत्तर देते हैं।

ज़िला प्रशासन ऊना सुपर-50 कार्यक्रम को हर तरह से प्रोत्साहित कर रहा है। उपायुक्त ऊना संदीप कुमार स्वयं निरंतर विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा करते हैं। अतिरिक्त उपायुक्त ऊना अरिंदम चैधरी ने बताया कि ‘‘कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्टडी मटिरीयल भी उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसे वे अपने घर जाकर पढ़ सकते हैं। लॉकडाउन के बीच विद्यार्थी कोचिंग सेंटर तक नहीं पहुंच पा रहे थे, इसलिए उन्हें स्टडी मटिरीयल उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस समस्या से पार पाने के लिए ज़िला प्रशासन ने विद्यार्थियों को उनके घर-द्वार पर किताबें पहुंचाईं; ताकि उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।‘‘

एक अन्य छात्र स्वास्तिक शर्मा ने बताया कि कुछ छात्रों के पास बेहतर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिससे वे रियल टाइम पर कोचिंग नहीं ले पाते हैं। ऐसे छात्रों के लिए रिकॉर्ड किए हुए वीडियो उपलब्ध करवाए जाते हैं, ताकि वे कोचिंग और पढ़ाई में पीछे न रह जाएं।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर मानते हैं कि हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थी बहुत मेहनती हैं और पढ़ाई में आगे भी हैं। लेकिन सही मार्गदर्शन तथा सुविधाओं की कमी के चलते वे प्रतियोगी परीक्षाओं में उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। जो विद्यार्थी सुविधा संपन्न हैं, वे चंडीगढ़ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग पाने में सक्षम रहते हैं; लेकिन सभी के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं। ऊना सुपर-50 कार्यक्रम ग्रामीण परिवेश के ऐसे ही मेधावी छात्रों की उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया सार्थक कदम है।

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