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नाहन

शीर्ष नेतृत्व ने मुझे जो ज़िम्मेदारी दी उन पर खरा उतरने का प्रयास करूँगा व पूरी निष्ठा भाव एवं समर्पण से निर्वाहन करूँगा चौधरी सुखराम

30 July 2020 6:01 AM GMT
शीर्ष नेतृत्व ने मुझे जो ज़िम्मेदारी दी उन पर खरा उतरने का प्रयास करूँगा व पूरी निष्ठा भाव एवं समर्पण से निर्वाहन करूँगा    चौधरी सुखराम
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चौधरी सुखराम ने कहा कि आज मैंने राजभवन में हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली,इसके लिए मैं माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे॰पी॰ नड्डा जी,माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी व भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का कोटि-२ आभार प्रकट करता हूँ।

मैं प्रदेशवासियो को पूर्ण विश्वास दिलवाता हूँ कि मुझे शीर्ष नेतृत्व ने मुझे जो ज़िम्मेदारी दी उन पर खरा उतरने का प्रयास करूँगा व पूरी निष्ठा भाव एवं समर्पण से निर्वाहन करूँगा।

मैं पाँवटा विधानसभा की जनता को कोटि-२ नमन करता हूँ जिन्होंने मुझे इस मुक़ाम पर पहुँचाया....मैं आपकी सेवा में और अधिक ज़िम्मेदारी के साथ कार्य करूँगा

चौधरी सुखराम पिता का नाम- स्व० तुलसी राम
माता का नाम- स्व० जैदो देवी का जन्म 15/04/1964
को पांवटा साहिब के अमरगढ़ पुरूवाला में हुआ चौधरी सुखराम की शिक्षा-10 वी तक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला माजरा तथा इलेक्ट्रिशियन का डिप्लोमा नाहन आई टी आई से हुआ है
चौधरी सुखराम की धर्मपत्नी-शशि बाला टी॰जी॰टी॰ आर्ट्स की अध्यापिका है तथा उनकी तीन बेटियाँ १-गीतांजलि चौधरी आईबीएम बैंगलुरू में जाब कर रही है उन्होंने जेपी यूनिवर्सिटी शिमला से इलेक्ट्रिक एंड काम इंजीनियरिंग दुसरी बेटी अनुराधा चौधरी टांडा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस व तीसरी बेटी नवनीत चौधरी पुने ला कालेज से वकालत की पढ़ाई कर रहीं हैं
चौधरी सुखराम एक किसान परिवार से सम्बंधित हैं।
राजनीतिक कैरियर सुखराम जी राजनीति में आने से पहले हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली विभाग में कार्यरत थे एवं संघ में सक्रिय रहे हैं।
सन 1997 में वह सक्रिय राजनीति में आयें व भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े।सन 1998 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी के टिकट से पाँवटा विधानसभा से लड़ने का मौक़ा मिला हालाँकि पारी की शुरुआत में वो हार गये,लेकिन तब से उन्होंने पीछे मूड कर नहीं देखा।
सन 2003 में वो पुनः पाँवटा से भाजपा प्रत्याशी बने व जीत हुए परंतु प्रदेश में सरकार कांग्रेस की बनी।
2007 में पुनः भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े,व जीते व 2010 में सीपीएस बने।
2012 में वो 690 के मामूली वोटों से हार गये थे।
2017 में वो पुनः जीत कर विधानसभा पहुँचे।
वे तीन बार भाजपा सिरमौर के अध्यक्ष,प्रदेश उपाध्यक्ष व पार्टी के चुनाव प्रचार हेतु हरियाणा,उतराखंड,जम्मू कश्मीर,गुजरात,मध्यप्रदेश,झारखंड,दिल्ली व आदि राज्यों में जा चुके हैं।

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