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मंडी

साहस की कोई उम्र नहीं होती ,राहुल रैना को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए सिफारिश

27 Jun 2020 12:41 AM GMT
साहस की कोई उम्र नहीं होती ,राहुल रैना को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए सिफारिश
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24 जून 2020 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की तहसील करसोग की तत्तापानी पंचायत के 16 वर्षीय बालक राहुल रैना अपनी जान की परवाह किए बगैर शाकरा पंचायत के मीन चंद को कोल बांध के तत्तापानी बांध में डूबने से बचाया। जीवन रक्षण का यह कार्य सभी कार्यों में पुनीत कार्य है और जीवन का पोषण और रक्षण जीवन का कर्तव्य है। तत्तापानी के 16 वर्षीय राहुल रैना ने एक युवक को सतलुज नदी पर बने बांध के आगोश से स्वयं बांध में छलांग लगाकर उस वक्त युवक को बचाया जब युवक की सांसे रुकने लगी थी। राहुल अपने होटल के टेरेस पर टहल रहा था जब उसने कुछ लोगों को बचाओ बचाओ चीखते घटना स्थल पर पाया। किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई की उफनती हुई नदी में जान पर खेलकर उस डूब रहे युवक को बचाये।

राहुल ने अपने जीवन की परवाह ना करते हुए नदी में छलांग लगाकर अपनी नन्ही बांहों से नदी की लहरों के पाशों से उस डूबते हुए युवक को पकड़ नदी के किनारे तक लाया। 16 वर्ष की आयु में अपनी शारीरिक क्षमता पर विश्वास रखते हुए अपनी जीवन दांव पर लगाकर इस वीर बालक ने वीरता की वह मिसाल पेश की जो बिरले ही देखने को मिलती है। आज जहां युवक दिग्भ्रमित है अपने ही जीवन की सही राह का पता नहीं ऐसे समय में राहुल जैसे अदम्य मानवीय संस्कारों से समाज को प्रेरणा मिलती है। निसंदेह राहुल की वीरता को देखते हुए उसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। ताकि बालकों के जीवन के प्रति जिजीविषा का मान उत्पन्न हो।

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