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काँगड़ा

किसानों व आम जनता की आँखों मे धूल झोंक कर किसानी को किया जा रहा चन्द उद्योगपतियों के हवाले

ManMahesh
10 Oct 2020 3:12 PM GMT
किसानों व आम जनता की आँखों मे धूल झोंक कर किसानी को किया जा रहा चन्द उद्योगपतियों के हवाले
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महाजन ने कहा कि कृषि विधेयक किसान के हित में न होकर बड़े उद्योगपतियों के हितों को साधने का षडयंत्र हैं जो धीरे धीरे किसान की जमीनों को भी लील जाएंगे।

डलहौज़ी हलचल (नूरपुर) संजीव कुमार : शनिवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवम नूरपुर के पूर्व विधायक अजय महाजन ने शनिवार को राजा का बाग में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी और विभिन्न किसान संगठन इन विधेयकों का भारी विरोध करते हुए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सरकार किसान की आवाज को अनसुना कर किसानी को पूरी तरह पूंजीपतियों के हवाले कर चुकी है। विधेयकों के बाद एफसीआई के क्षेत्रीय खरीद केंद्र बंद हो चुके हैं और किसानों को व्यपारियों पर निर्भर कर दिया गया है जो किसानों को लूट रहे हैं ।

महाजन ने कृषि विधेयकों के आने के बाद की स्थिति की असलियत बताते हुए कहा कि पिछले साल मक्की की फसल का एमएसपी 1850 था और तब मक्की की फसल 1900 से 2000 रुपये किविंटल बिकी थी और अब कृषि बिल आने के बाद व्यापारियों द्वारा वही मक्की की फसल 800 रुपये किवंटल खरीदी जा रही है जोकि एमएसपी से भी आधे रेट में सिमटकर रह गई है। महाजन ने कहा कि हिमाचल में मक्की की एक अहम फसल है जोकि किसानों की आर्थिकी का एक जरिया है लेकिन इस बार मिल रहे ओने पौने दाम से किसान को लुटने पर मजबूर किया गया है ।


महाजन ने कहा कि भाजपा के नेता किसानों व आम जनता की आँखों मे धूल झोंक कर किसानी को चन्द उद्योगपतियों के हवाले करने की ओर बढ़ रही है। महाजन ने आरोप लगाया कि एक तरफ कोविड 19 के कारण किसानों को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है बेहतर यह होता कि केंद्र सरकार किसानों को राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त कदम उठाती लेकिन पूरे देश के ढांचे को लगातार निजीकरण और पूंजीपतियों के हवाले करने की रफ्तार में अब किसानों को भी उन्हीं के हबाले किया जा रहा है । महाजन ने कहा कि कृषि विधेयक किसान के हित में न होकर बड़े उद्योगपतियों के हितों को साधने का षडयंत्र हैं जो धीरे धीरे किसान की जमीनों को भी लील जाएंगे।

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