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काँगड़ा

महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने में नई राह दिखा रहा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

ManMahesh
27 Aug 2020 11:16 AM GMT
महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने में नई राह दिखा रहा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
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आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के जीवन स्तर को बेतहर एवम आत्मनिर्भर बनने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन नई राह दिखा रहा है।

डलहौज़ी हलचल (नूरपुर) संजीव कुमार :- हिमाचल प्रदेश मूलतः एक ग्रामीण राज्य है, जिसकी अधिकतर आबादी गावों में बस्ती है। प्रदेश सरकार का मुख्य ध्येय ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने के साथ-साथ महिलाओं के जीवन में बदलाव लाकर यहां की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के जीवन स्तर को बेतहर एवम आत्मनिर्भर बनने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन नई राह दिखा रहा है। नूरपुर विकास खंड के तहत खेल पंचायत के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिलाओं ने वर्ष 2016 में इसी मिशन के तहत श्री लक्ष्मी स्वयं समूह का गठन किया । महिलाओं की इस समूह के गठन के प्रति एक यही सोच थी, कि छोटी-छोटी बचत व बेहतर प्रबंधन से आय के अन्य साधन जुटा कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद की जा सके।

समूह की महिलाओं की लग्न व मेहनत को देखते हुए खंड विकास कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दस हज़ार रुपये रिवॉल्विंग फंड के रूप में, जबकि 2500 रुपए की राशि स्टार्ट अप फंड के तौर पर प्रदान की गई। इस राशि को अपनी बचत के साथ जोड़ कर समूह के पास लगभग 56 हज़ार रुपये की राशि जमा हो गई है। समूह की सभी सदस्य जरूरत पड़ने पर बारी-बारी से इस राशि का उपयोग करके ब्याज सहित वापिस लौटा रही हैं, जिससे समूह की बचत लगातार बढ़ रही है।




समूह की सदस्य इसी बचत के उपयोग से रेडीमेड लेडिज सूट, ब्यूटी पार्लर तथा बुटीक का कार्य शुरू करके अपनी आय को बढाना चाहती थीं, परन्तु कम बचत के कारण उन्हें यह कार्य किसी चुनौती से कम नहीं लग रहा था। समूह की सदस्यों ने इस बारे खंड विकास कार्यालय से संपर्क किया। कार्यालय द्वारा उन्हें बिना किसी गारंटी से 4 प्रतिशत ब्याज दर पर बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण दिलाया गया, जिससे इन महिलाओं ने रेडीमेड लेडिज सूट, ब्यूटी पार्लर तथा बुटीक का कारोबार शुरू किया है। इस समूह की सदस्य अब महीने में लगभग 20 से 25 हज़ार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। समूह अपनी आय से बैंक को अब तक 2 लाख 70 हज़ार का ऋण वापिसी कर चुका है। सरकार की इस मदद द्वारा समूह के सदस्यों की आय में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक तौर से आत्मनिर्भर बनने में नई राह प्रदान की है।

बीड़ीओ नूरपुर डॉ रोहित शर्मा ने बताया कि विकास खंड के तहत अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूह गठित करने के लिए प्रेरित करने के साथ उन्हें विभागीय योजनाओं की सम्पूर्ण जानकारी मुहैया करवाई जा रही है, ताकि महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बैंकों से बिना किसी गारंटी के 3 से 10 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। जिससे समूह अपना खुम्ब फार्म, डेयरी फार्मिंग, डूना व पत्तल उद्योग, बैग व लिफाफा उद्योग, बुटीक, सिलाई-कढ़ाई, पापड़ व बड़ियों का कारोबार, रेशम, मधुमखी तथा बकरी पालन सहित अन्य कारोबार कर सकती हैं।

क्या कहते हैं एसडीएम

एसडीएम, नूरपुर सुरेंद्र ठाकुर का कहना है कि विकास खंड के तहत 43 पंचायतों में अब तक 495 स्वयं सहायता समूहों सहित 24 ग्राम संगठन कार्य कर रहे हैं। इन समूहों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियों से जोड़ कर 4230 महिलाओं को इसकी मुख्यधारा में शामिल किया गया है, ताकि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।



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