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काँगड़ा

अपने लिय जिए तो क्या जिए , सदबां के शेखर चन्द्र पठानियाँ मरणोपरांत दान देंगे अपनी आँखे

ManMahesh
25 Sep 2020 12:38 PM GMT
अपने लिय जिए तो क्या जिए , सदबां के शेखर चन्द्र पठानियाँ मरणोपरांत दान देंगे अपनी आँखे
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गैरी ट्रस्ट व गरीब कल्याण कपड़ा बैंक संस्था के सदस्य के तौर पर क्षेत्र में गरीब व असहाय लोगों की मदद के लिए हमेशा अग्रसर रहते हैं । शुक्रवार को मरणोपरांत उन्होंने नेत्रदान करने का फैसला किया है उनके इस दान से और लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है ।

डलहौज़ी हलचल (नूरपुर) संजीव कुमार : विकास खण्ड नूरपुर की पंचायत सदबां के गाँव बरेट के निवासी और प्रमुख समाज सेवी शेखर चन्द्र पठानियाँ ने मरणोपरांत टांडा मेडिकल कालेज को अपने दोनों नेत्र दान करने का निर्णय लिया है । नेत्र दान के लिए उन्होंने शुक्रवार को टांडा मेडिकल कालेज के आई बैंक में अपनी सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं । शेखर पठानियाँ ने बताया कि शुक्रवार को जब वह अपनी माता जी की आंखों की जांच करवाने टांडा मेडिकल कालेज गए तो उन्होंने वहां कुछ दृष्टिविहीन लोगों को देखा जिनसे उन्हें यह प्रेरणा मिली कि यदि उन्हें नेत्र दान में मिल जाएं तो वे लोग भी इस संसार को अपनी आँखिन से देख सकते हैं ।

पंचतत्व से बना यह शरीर आखिर में अग्नि के आगोश में आकर मिट्टी में समाहित हो जाएगा । इससे अच्छा है कि उनकी आंखों से कोई दृष्टिविहीन व्यक्ति संसार की खुशियों को अपनी आंखों से देख सके । गौरतलब है कि 55 बर्षीय शेखर पठानियाँ नूरपुर क्षेत्र में समाज सेवा के लिए एक चर्चित चेहरा हैं । उन्होंने विभिन्न रक्तदान शिविरों और जरूरतमंद लोगों को रक्त प्रदान करने के लिए 29 बार रक्तदान किया है।

वह गैरी ट्रस्ट व गरीब कल्याण कपड़ा बैंक संस्था के सदस्य के तौर पर क्षेत्र में गरीब व असहाय लोगों की मदद के लिए हमेशा अग्रसर रहते हैं । शुक्रवार को मरणोपरांत उन्होंने नेत्रदान करने का फैसला किया है उनके इस दान से और लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है ।

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