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लाहुल स्पिति

पहली बार स्पीति के किसानों ने प्राकृतिक खेती के तहत तैयार उत्पादों के लिए लगाया स्टॉल

रजनीश शर्मा
20 Aug 2020 9:52 AM GMT
पहली बार स्पीति के किसानों ने प्राकृतिक खेती के तहत तैयार उत्पादों के लिए लगाया स्टॉल
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लाहुल स्पीति के काजा उपमंडल में किसान -अपनी मंडी- में अपनी सब्जियां अच्छे दामों पर बेच रहे है। स्थानीय लोग भारी मात्रा में यहां से सब्जियां खरीद रहे है।

डलहौज़ी हलचल (लाहुल स्पीति): लाहुल स्पीति के काजा उपमंडल में किसान -अपनी मंडी- में अपनी सब्जियां अच्छे दामों पर बेच रहे है। स्थानीय लोग भारी मात्रा में यहां से सब्जियां खरीद रहे है। स्थानीय प्रशासन ने प्राकृतिक तरीके से उगाई गई सब्जियों को बेचने के लिए -अपनी मंडी- स्थापित की है। पहली बार कृषि विभाग ने अपनी मंडी का स्टाल लगाया है। दुर्गम जनजाति क्षेत्र लाहौल स्पीति पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक खेती हो रही है। लेकिन यहां पर फसल विविधीकरण इतने व्यापक स्तर पर नहीं था। कृषि विभाग ने विविधीकरण का भी विस्तार करते हुए किसानों को जागरूक किया और प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को और बारीकियां सिखाई ।

'अपनी मंडी' स्टॉल पर ब्रोकली, बंद गोभी, धनिया मूली , देसी शलगम, लेट्यूस आदि प्रमुख सब्जियां है । लाकडाउन में इस बार प्रगतिशील किसानों को तैयार हुई फसल को बेचे जाने को लेकर चिंता सता रही थी। किसानों ने कृषि विभाग के समक्ष मामला उठाया कि उन्हें अपने उत्पाद बेचने में दिक्कत हो रही है। क्योंकि एक तरफ लॉकडाउन भी है और दूसरी तरफ वो पहली बार इस तरह के उत्पाद बाजार में सही दामों पर बेचना चाह रहे हैं। इसी मामले को कृषि विभाग ने सुलझाते हुए अपनी मंडी नाम से काजा में स्टॉल लगाने का फैसला लिया और एडीएम ज्ञान सागर नेगी से स्टॉल लगाने की अनुमति ली। अपनी मंडी में यीशे डोलमा और उर्गेन, अंकित, नवांग, दिलीप,टाशी नवांग आदि किसानों ने स्टाल पर सब्जियां बेच रहे। सूचना प्रौद्योगिकी, जनजातीय, तकनीकी शिक्षा जन शिकायत मंत्री डा राम लाल मारकण्डा भी यहां पर फसल विविधिकरण को लेकर कृषि विभाग को आदेश दे चुके थे। स्पीति में हर साल हजारों पर्यटक आते है। ऐसे में यहां पर स्थापित होटल होम स्टे में प्राकृतिक सब्जियों की मांग काफी अधिक रहती है। इसलिए किसानों को अपने उत्पादों की चिंता कभी भी सताने वाली नहीं हैं।

प्राकृतिक खेती के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण

काजा उपमंडल में कृषि विभाग के तहत चल रहे आत्मा प्रोजेक्ट में स्पीति क्षेत्र के किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के अधीन प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती से कम लागत में स्वास्थ्य और अधिक उत्पाद कैसे तैयार किया जाता है। इसके बारे में यहां के किसानों को सिखाया जा रहा है। इसी वजह से स्पीति में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हो रहा है । पहले केवल सब्जियां अपने गुजारे के लिए उगाते थे। लेकिन अब रोजगार के तौर पर भी इन्हें उगाया जा रहा है। प्राकृतिक सब्जियों की मांग काफी अधिक है ।

बिचोलियों से बच रहे किसान

पहले किसान अपनी फसल आढ़तियों को बेचते थे। ऐसे में किसानों को सही दाम नहीं मिलता था। लेकिन अब अपनी मंडी में सीधे तौर पर किसान अपनी फसल उपभॊक्ताओं को बेच पा रहे हैं। ऐसे में किसानों को अपनी मंडी से काफी लाभ हो रहा है।

अपनी मंडी में बेची चालीस हजार रूपये की सब्जियां- यीशे डोलमा

हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति जिला के स्पीति क्षेत्र के लिदांग की रहने वाली यीशे डोलमा ने प्राकृतिक खेती के तहत उगाई हुई सब्जियों को लाकडाउन के चलते भी अच्छे दामों पर बेच रही है। डोल्मा अभी तक अपनी मंडी में चालीस हजार रूपये की सब्जियां बेच चुकी है। पहले भी मटर की छोड़ कर कई सब्जियां उगाती थी लेकिन केवल अपने खाने के लिए। लेकिन इस बार कृषि विभाग ने हमें व्यापक स्तर पर सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया था। जब लाॅकडाउन लगा तो स् फसल बिजाई की चिंता हो रही थी। विभाग ने सब्जियों की पनीरी मुहैया करवाई । जीवामृत का इस्तेमाल करके सारी सब्जियों को उगाया गया है।

यीशे डोलमा ने बताया कि लाॅकडाउन जब लगा था सभी ने डरा दिया था कि कई महीनों तक ये चलेगा ऐसे में सब्जी की कमी होना लाजमी था। विभाग के अधिकारी स्टाफ हमारे पास आते रहे और हमें जागरूक करते रहे। इस बार मैंने सीधे बाजार में सब्जी बेच रहे है । मुझे अच्छे दाम अपनी मंडी स्टाल पर मिले। मैं प्रशासन का आभार व्यक्त करती हूं। हर साल इसी तरह स्पीति के किसानों के अपनी मंडी लगती रहे तो हमारी आर्थिक मजबूत होगी।

क्या कहते है प्रगतिशील किसान

अपनी मंडी में अपनी सब्जियां बेच रहे ढंखर के दिलीप कुमार ने बताया कि अपनी मंडी बहुत अच्छा मंच है। इससे किसानों को अच्छे दाम भी मिल रहे है। वहीं दूसरी तरफ किसानों को सब्जियां खराब होने का डर भी नहीं है। इसी तरह अगर मंडी लगती रहे तो हम हर साल इसी तरह सब्जियां उगाते रहें। रंगरीक के रहने वाले किसान टाशी नामज्ञयाल ने कहा कि आज कल तो पर्यटन सीजन भी नहीं है लेकिन फिर भी हमें सब्जियों के दाम अच्छे मिल रहे है । क्योंकि अपनी मंडी में हम सीधे उपभोक्ताओं को बेच रहे है।

क्या कहते है एडीएम ज्ञान सागर नेगी

एडीएम ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि यहां पर वर्षों से प्राकृतिक कृषि हो रही है लेकिन प्राकृतिक खेती में भी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। इसके बारे में कृषि विभाग ने स्पीति के किसानों को प्रशिक्षित किया है। आजकल लोग केमिकल से तैयार होने वाले सब्जियों, उत्पादों को प्राथमिकता नहीं देते हैं। बल्कि प्राकृतिक तौर पर तैयार होने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं। अपनी मंडी स्टॉल लगाकर यहां के उत्पाद को सीधे मार्केट में बेचना बहुत अच्छा प्रयास है। इससे किसान बिचैलियों के चंगुल से बच पाएगा और सही दाम किसान को मिल सकेगा। स्थानीय प्रशासन किसानों की मदद करने के लिए प्रयासरत हैं ।

क्या कहते है कृषि विकास अधिकारी काजा सुभाष

कृषि विकास अधिकारी काजा सुभाष ने कहा कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के तहत किसानों को प्रशिक्षित किया गया है । उन्हें फसलविविधिकरण के तहत यहां कि परम्परागत फसलों को छोड़ कर अन्य सब्जियों को उगा रहे है। किसानों को केवीके ताबों से पनीरी लाकर दी गई और इन्हें पहले ही आश्वसन दिया गया था कि आप फसल तैयार करें सब्जियों को बाजार में सही दामों पर बेचने का प्रयास विभाग करेगा। फिर अपनी मंडी स्थापित करके किसान अपनी सब्जियों की सीधे उपभोक्ताओं को बेच रहे है। हर साल इसी तरह अपनी मंडी में लगाई जाएगी।

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