Top
राष्ट्रीय

दोस्त को खोने के गम ने बना दिया हेलमेट मैन, निशुल्क बाँट चुके है 42000 हेलमेट

ManMahesh
12 Oct 2020 4:08 AM GMT
दोस्त को खोने के गम ने बना दिया हेलमेट मैन, निशुल्क बाँट चुके है 42000 हेलमेट
x
दोस्त की मौत के बाद बिहार के इस युवक ने नौकरी छोड़ दी, और अपनी जिन्दगी को दूसरों की जिंदगी बचाने में लग गया ।

डलहौज़ी हलचल (ब्युरो) : दोस्त की मौत के बाद बिहार के इस युवक ने नौकरी छोड़ दी, और अपनी जिन्दगी को दूसरों की जिंदगी बचाने में लग गया । हम बात कर रहे है राघवेंद्र कुमार की जो अब हेलमेट मैन के नाम से जाने जाते है। 90 प्रतिशत बिना हेलमेट चलने वालों का ट्रैफिक पुलिस चालान करती है और इनमें से 60% ऐसे लोग हैं जिनके एक से ज्यादा चालान हो रखे हैं लेकिन भरना नहीं चाहते हैं या मैसेज आने के बावजूद भी अनदेखा कर रहे हैं और घर पर चालान का नोटिस आने का इंतजार करते हैं। ऐसे लोगों से हेलमेट मैन राघवेंद्र कुमार ने अपील की है कि वह अपना चालान भरे और अपनी रसीद लेकर आएं राघवेंद्र उन्हें हेलमेट भी देंगे और 5 लाख का दुर्घटना बीमा भी।


पिछले 1 महीने से हेलमेट मैन के नाम से प्रसिद्ध राघवेंद्र कुमार ने चालान भरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी ला दी है। जो लोग अपना चालान ऑनलाइन के माध्यम से जमा करते हैं उन्हें भी वहीं पर हेलमेट मैन एक हेलमेट के साथ 5 लाख की दुर्घटना बीमा करके देते हैं। लोगों को बहुत हैरानी होती है और खुशी भी होती है। बहुत से लोग पूछते भी हैं इसमें आपका क्या फायदा है। तब हेलमेट मैन कहते हैं दूसरों की जान बचाने जागरूक करने में कभी खुद का फायदा नहीं देखा जाता आपको दोस्त मानता हूं क्योंकि हमने दोस्त को एक ऐसे ही दर्घटना में खोया है।


हेलमेट मैन राघवेंद ने बताया कि 2014 में एक सड़क दुर्घटना में उनके दोस्त की मौत हो गई थी क्योंकि उनके दोस्त ने हेलमेट नहीं पहना था। तब से राघवेंद्र भारत के तमाम राज्यों में हेलमेट देने और दुर्घटना बीमा कराने का अभियान चला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वह भारत को सड़क दुर्घटना मुक्त बनाना चाहता हैं और देश को 100% साक्षर करना चाहता हूं। यही मेरी सोच है इसलिए प्रतिदिन सड़कों पर लोगों को हेलमेट देता रहता हूं। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए वह राज्य या केंद्र सरकार से किसी तरह की मदद नहीं लेते हैं।


उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के पहले तक वह हेलमेट के बदले लोगं से सिर्फ पुस्तक लेते थें, जिसे वह जरुरतमंद बच्चों में बांट दिया करते थें। हेलमेट मैन अब तक 42000 हेलमेट नि शुल्क बांट चुके हैं। इस मिशन के लिए आर्थिक समस्या के कारण ग्रेटर नोएडा का घर भी बेच दिया, लेकिन पैसे के लिए किसी के पास हाथ नहीं फैलाया। इनके कार्य की सराहना भारत के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कर चुके हैं, लेकिन मदद के लिए सरकार या प्रशासन कभी आगे नहीं आया।


Next Story

हमीरपुर