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शीतकालीन ओलिम्पिक की ल्यूज स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले मनाली के शिवा केशवन का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए नामांकित

ManMahesh
20 Aug 2020 5:57 AM GMT
शीतकालीन ओलिम्पिक की ल्यूज स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले मनाली के शिवा केशवन का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए नामांकित
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शीतकालीन ओलिम्पिक की ल्यूज स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय शिवा केशवन का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए नामांकित हुआ है। शिवा केशवन हाल ही में भारतीय ल्यूज महासंघ के मुख्य कोच भी बने हैं।

डलहौज़ी हलचल (कुल्लू) : शीतकालीन ओलिम्पिक की ल्यूज स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय शिवा केशवन का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए नामांकित हुआ है। शिवा केशवन हाल ही में भारतीय ल्यूज महासंघ के मुख्य कोच भी बने हैं। अर्जुन पुरस्कार विजेता बनने जा रहे शिवा केशवन के मनाली गांव में खुशी का माहौल है। शिवा केशवन की इस कामयाबी को लेकर जहां स्थानीय विधायक एवं शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने उन्हें व उनके परिजनों को विशेष तौर पर बधाई दी है तो वहीं शीतकालीन खेलों के प्रेमी इसे एक बढ़ी कामयाबी मान रहे हैं।

शिवा केशवन हाल ही में भारतीय ल्यूज महासंघ के मुख्य कोच भी बने हैं। अर्जुन पुरस्कार विजेता बनने जा रहे शिवा केशवन के गांव मनाली में खुशी का माहौल है। केशवन ने 22 साल तक ल्यूज स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। शिवा मनाली के बशिष्ठ गांव के रहने वाले हैं। शिवा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए 10 पदक जीते हैं तथा कई विश्व एवं एशियाई रिकार्ड अपने नाम किए हैं।

केशवन ने 1998 से 2018 तक 6 शीतकालीन ओलिम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2018 शीतकालीन ओलिम्पिक के बाद संन्यास ले लिया। शिवा की मां इटली की हैं और पिता केरल निवासी जो मनाली में रहते हैं। शिवा के पिता मनाली में अपना एक रेस्तरां चलाते हैं। केशवन की माता रोशलवा, पिता सुधाकरन व शिवा के दोस्त विशाल ने बताया कि जब शिवा ने उन्हें अर्जुन अवार्ड के लिए नाम चयनित होने की बात बताई, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। शिवा केशवन ने कहा कि यह सम्मान मिलना उनके लिए सपने जैसा है। इसके लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा है, लेकिन देश ने मेरी प्रतिभा का सम्मान कर ल्यूज खेल को भी मान दिया है। उन्होंने कहा कि मनाली के बच्चों में भी शीतकालीन खेलों के प्रति बेहद जुनून है।

ल्यूज एक लकड़ी व प्लास्टिक से बनी पट्टी के आकार की स्की होती है जिस पर बैठकर बर्फ की परत पर फिसला जाता है। इसे ल्यूज खेल कहा जाता है। 2011 में मनाली के शिवा केशवन ने एशियन गेम्स में स्वर्ण हासिल कर घाटी के युवाओं का ध्यान इस खेल की ओर आकॢषत किया था। शिवा केशवन की लगन व रुचि से मनाली में इस खेल की लोकप्रियता बढ़ी है।

गौरतलब है कि हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस पर यह सम्मान दिया जाएगा।


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